नई दिल्ली: AIMIM उत्तर प्रदेश में विधान सभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद उत्तर प्रदेश में सभी पार्टियों के सियासी दांव पेंच शुरू हो गए हैं। ऐसे में ही असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। इस सूची में 9 उम्मीदवारों के नाम हैं जो की मेरठ, हापुड़, गाजियाबाद, सहारनपुर और बरेली से चुनाव के मैदान में उतरेंगे। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम (AIMIM) उत्तर प्रदेश में कुल 100 सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

इस सूची के अनुसार, प्रवचन क्षेत्र लोनी (Loni) से डा. मख्ताब, गढ़ मुक्तेश्वर (Garh Mukhteswar) से फुरकान चौधरी, धौलाना (Dhaulana) से हाजी आरिफ़, सीवल खास (Siwal Khas) से रफत खान, सरधना (Sardhana) से ज़ीशान आलम, किठौर (Kithore) से तस्लीम अहमद, बेहत (Behat) से अमजद अली, बरेली-124 (Bareily-124) से शाहीन रज़ा खान उर्फ राजू और सहारनपुर देहात (Saharanpur Dehat) से मरगूब हसन चुनाव लडेंगे।

AIMIM की स्थापना:

आल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) की स्थापना 2 मार्च 1958 को हुई थी। इसकी स्थापना असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) के दादा अब्दुल वाहेद ओवैसी (Abdul Wahed Owaisi) द्वारा की गयी थी। पार्टी के सूबे के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी हैं और इसके महासचिव (General Secretary) सईद अहमद पाशा क़ादरी (Syed Ahmed Pasha Quadri) हैं। दरअसल इस पार्टी का गठन भारत में सभी अल्पसंख्यक (Minorities) जाती वालों के लिए किया गया था जिसमें मुस्लिम और दलित अल्पसंख्यक भी शामिल हैं। पार्टी का अपना खुद का एक न्यूज़पेपर भी है जिसका नाम एतेमाद डेली (Etemaad Daily) है और यह पेपर उर्दू में छापा जाता है। पार्टी के हेडक्वार्टर्स (Headquarters) हैदराबाद में स्थित हैं।

उत्तर प्रदेश का सियासी इतिहास:

उत्तर प्रदेश के चुनाव पूरे देश में सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण होते हैं. कहा जाता है की यहाँ की राजनीती ऐसी होती है की अगर यहाँ पर एक बार आपकी मज़बूत पकड़ बन जाये तो फिर इससे आपकी सियासी पकड़ के मजबूत होने का पता लगता है. हालांकि उत्तर प्रदेश की सियासत इतनी आसान भी नहीं है, भारत के 29 राज्यों में यह वह एक राज्य है जिसकी सियासत काफी पेंचीदा है. हालांकि उत्तर प्रदेश की राजनीती इतनी आसान भी नहीं है की यहाँ पर कोई भी राजनीतिक दाल अपनी पकड़ इतनी आसानी से बना ले.

इस राज्य का राजनीतिक इतिहास काफी ज्यादा मुश्किल और पेचीदा रहा है. यहाँ का यह इतिहास रहा है कि यहाँ पर किसी भी पार्टी की सरकार दोबारा नहीं बानी हैं और अगर बानी भी है तो काफी छोटे कार्यकाल तक ही टिक पायी है. यूपी की सियासत पर पकड़ बनाना और वह पकड़ लम्बे अरसे तक बनाये ही रखना ऐसा है जैसे किसी बिल्ली के गले में घंटी बांधना।

AIMIM

यूपी का पहला विधानसभा चुनाव 1952 में हुआ था जब उत्तर प्रदेश के सियासत पर कांग्रेस का राज था. कांग्रेस ने यह चुनाव जीत लिए और कांग्रेस से पंडित वल्लभ पंत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने. इसके बाद वर्ष 1967 में चौधरी चरण सिंह यूपी के मुख्यमंत्री बने और फिर उन्होंने अपनी खुद की पार्टी भारतीय क्रांति दाल का निर्माण किया. इसके बाद वर्ष 1977 में यूपी में जनता पार्टी की सरकार बनी और फिर 1980 से 1988 तक यूपी में 6 मुख्यमंत्री बदले। उत्तर प्रदेश में इसी प्रकार चुनावी दांव पेंच चलते रहे कई सरकारें आयीं और कई सरकारें गयीं लेकिन लम्बे समय के लिए कोई भी नहीं टिका यहाँ.

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव कुल मिलाकर सात चरणों में होंगे। पहले चरण का चुनाव 10 फरवरी को होगा तथा अंतिम चरण का चुनाव 7 मार्च को होगा। चुनाव में डाले गए मतों की गिनती बाकी चार राज्यों (Uttarakhand, Punjab, Manipur, Goa) के मतों के साथ ही 10 मार्च को होगी।