Banda: उत्तर प्रदेश के बांदा ज़िले में एक और दुष्कर्म का मामला सामने आया है जब एक नाबालिग बच्ची के साथ एक युवक ने बलात्कार किया है। आपको बता दें कि पिछले 24 घंटों में बांदा से आने वाला यह दूसरा बलात्कार का मामला है। बांदा से इसके पहले भी एक दुष्कर्म का मामला सामने आया था जिसमें एक नाबालिग के साथ 4 महीने पहले बलात्कार का मामला सामने आया था। यह अब बांदा से आने वाला पिछले 24 घंटों में दुष्कर्म का दूसरा मामला है।

दरअसल यह नाबालिग दलित परिवार की बच्ची गांव के खेत में बकरियां चराने गई थी। वहीं गांव के ही एक युवक ने इस बच्ची का अपहरण कर उसे सरसों के खेत में ले गया और उसके साथ बलात्कार जैसे दुष्कर्म को अंजाम दिया। इस वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी युवक वहां से मौके पर ही फरार हो गया था।

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इस घटना की जानकारी होते ही बच्ची के परिवार वालों ने पास के ही पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज करवाई। पीड़िता के परिवार वालों ने आरोपी का नाम अल्लू यादव बताया है। पुलिस ने इस मामले को पोस्को एक्ट (Protection Of Children From Sexual Offences Act) और एससी/एसटी एक्ट (Schedule Castes/Schedule Tribes Act) के तहत दर्ज किया है। पीड़ित बच्ची को जांच के लिए सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। युवक अभी फरार है और पुलिस अब भी उसकी तलाश कर रही है।

इस मामले के एक दिन पहले ही बंदा के फतेहगंज पुलिस स्टेशन में ऐसा ही एक और मामला सामने आया था जिस में एक हरिजन बच्ची के साथ भी दुष्कर्म किया गया था. इस मामले को फतेहगंज में दर्ज कराया गे था. दरअसल 4 महीने पहले इस बच्ची के साथ बलात्कार किया गया था लेकिन 4 महीने बात जब यह बच्ची प्रेग्नेंट हुई तब घर वालों को इस बात की भनक लगी और वह बच्ची को लेकर फ़ौरन पुलिस थाने पहुंचे और रिपोर्ट दर्ज कराई।

बच्ची की गुहार लगाने पर पुलिस अधिकारीयों ने यह मामला दर्ज कर दिया और इसकी पड़ताल अब भी ज़ारी है. पुलिस ने बच्ची को कुछ मेडिकल टेस्ट के लिए अस्पताल भेज दिया था और इस मामले को भी पोस्को एक्ट (Protection Of Children From Sexual Offences Act) और एससी/एसटी एक्ट (Schedule Castes/Schedule Tribes Act) के तहत दर्ज कर लिया था।

सरकार चाहे कितने भी ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ जैसे अभियान ले कर आ जाये लेकिन सवाल तो यही है की जब बेटियां रहेंगी ही नहीं तो पढेंगी क्या? सरकार ने सुरक्षा के कई वादे किये तो हैं लेकिन उन में से शायद ही कोई ववदे पुरे हुए होंगे या फिर वह भी नहीं। दोष केवल सरकार का ही नहीं बल्कि दोष इन दरिंदों और इनकी मानसिकता का भी है। इनकी सोच में कोई भी दरिंदगी का रास्ता एक छोटा मोटा रास्ता है जो यह कभी भी कहीं भी तय कर सकते हैं बिना किसी रोक टोक के।

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इनके लिए यह सोच भी मायने नहीं रखती की जिन के साथ यह ऐसे दुष्कर्म कर रहे हैं वह किसी की माँ, किसी की बहन और किसी की बेटी हो सकती है। और किसी दिन ऐसे दुष्कर्म की सजा इनकी बहन और बेटियों को भी मिल सकती है। ऐसे दरिंदों के साथ तो इनकी खुद की बहनें, बेटियां और माताएं भी सुरक्षित नहीं हैं।

इस वहशीपन का केवल एक ही इलाज है की सर्कार इनके खिलाफ कोई सख्त से सख्त कदम उठाये जिसके बाद कोई भी इंसान ऐसी दरिंदगी को अंजाम देने से पहले हज़ार मर्तबा सोचे। जब नियम और क़ानून सख्त होंगे तो इंसान की हिम्मत खुद बखुद कमज़ोर पद जाएगी और ऐसे दरिंदों के अंदर खौफ पैदा होगा।