योगिता लढ़ा, नई दिल्ली। ORISSA देश में कोरोना के मामलों में देन-बे-दिन भारी उछाल देखने को मिल रहा है। हर दिन रिकोर्ड तोड़ मामले कहर बरपा रहे हैं। राज्य के सूचना और जनसंपर्क विभाग (State Information and Public Relation Department) ने बताया है कि ओडिशा (Orissa) ने रविवार को 11,177 नए कोविड -19 मामले दर्ज किए। जिसमें से 1,016 संक्रमित ऐसे है जिनकी उम्र 18 साल से कम हैं।

रिकोर्ड तोड़ मामलों में कुल पॉजीटिव केस में से, 6,479 मामले संगरोध केंद्रों (quarantine centres) से पाए गए और जबकि 4,698 स्थानीय संपर्क के मामले सामने आए हैं।

जानें कोनसे ज़िलों से आ रहे सबसे ज़्यादा केस? ORISSA

राज्य की राजधानी भुवनेश्वर (Bhubaneswar) के खुर्दा जिला (Khurda district) में सबसे ज़्यादा मामले सामने आए। जिनकी संख्या 3,424 बताई जा रही हैं। इसके बाद 2,136 मामलों के साथ सुंदरगढ़ (Sundergarh), कटक (Cuttack) (829), संबलपुर (Sambalpur) (379), बालासोर (Balasore) (342), बोलांगीर (Bolangir) (312), मयूरभंज (Mayurbhanj) ( 276) और सोनपुर (Sonpur) (238)। सभी बचे हुए जिलों में रविवार को 200 से कम मामले देखे गए थे।

आपको बता दें, डेली टेस्ट पॉजीटिविटी रेट (TPR) पिछले दिन के 14.48 प्रतिशत के मुकाबले बढ़कर 14.49 प्रतिशत हो गई है। जो परेशान करने वाली खबर हैं। इस बीच, राज्य सरकार ने कोविड-19 (Covid-19) के कारण तीन अन्य लोगों की मौत की पुष्टि की है। स्वास्थ्य ऑडिट में सुंदरगढ़, गंजम और नयागढ़ जिलों से एक-एक मौत की सूचना मिली, जिससे राज्य में कुल मौतों की संख्या 8,481 हो गई।

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अब तक, ओडिशा ने 11,33,912 कोविड मामले दर्ज किए हैं। जिनमें से 10,55,615 लोग संक्रमण से उबर चुके हैं यानी नेगेटिव हो कर घर लौट चुके हैं। राज्य में कुल सक्रिय केस लोएड 69,763 है।

कोरोना वायरस का संक्रमण देश में तेज़ी से बढ़ा जा रहा है। इस से अंदाजा लगाया जा सकता है की यह कितना घातक हो सकता है देश के लिए। देश में पिछले वर्ष ही कोरोना के संक्रमण के दब दबे में आकर बहुत से लोगों ने अपनी जान गवाई है, बहुत से लोगों ने अपने परिवार के सदस्यों को खोया है, बहुत से बच्चे अनाथ भी हुए। इन सभी चीज़ों के दौरान सरकार की लापरवाही भी पिछले साल देखने को मिली थी जब अस्पतालों में बिस्तरों की कमी पड़ गयी थी और लोग ऑक्सीजन के बिना अपनी जान गवा रहे थे।

ORISSA Corona Cases

कई लाशें नदियों के किनारे पर बहती हुई मिली थी, कई लोगो को अपने प्रियजनों की लाशें भी नहीं मिली की वह उनका अंतिम संस्कार कर सकें। आलम यह भी था की शमशान घाटों पर लाशों का ढेर लगा हुआ था और लाशें एक के बाद एक जाली जा रही थीं। इन सारी चीज़ों को पिछले साल देखने के बाद भी लोग आज इतनी लापरवाही बरत रहे हैं। लोग अब भी घरों से बहार बिना मास्क के निकल जाते हैं यह सोच कर की कोरोना जैसी चीज़ अब देश में तो क्या दुनिया में ही कही नहीं बसती है।

इस वर्ष ऐसा प्रतीत हो रहा है की लोग पिछले साल की हुई उस भयानक घटना को भूल कर काफी आगे बढ़ चुके हैं। लोगों में जो जागरूकता उत्पन्न हुई थी वह एक बार फिर से गायब होती हु दिख रही है। लोग अभी भी मौज मस्ती और घूमने फिरने में लगे हुए हैं और तो और कई लोगों ने तो मास्क और सैनिटाइज़र (Mask And Sanitizer) का इस्तेमाल तो बिलकुल बंद ही कर दिया है मानो जैसे कोरोना वायरस जैसा संक्रमण देश में कभी हुआ ही नहीं था और लाखों लोगों के परिवार जैसे उजड़े ही नहीं थे।

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इस संक्रमण का जल्द से जल्द अंत करने के लिए सबसे ज़्यादा ज़रूरी है लोगों का जागरूक होना। जब तक लोग जागरूक हो कर लगातार मास्क और सैनिटाइज़र का प्रयोग नहीं करेंगे और समय पर अपना टीका कारन नहीं करवायेंगे तब तक इस भयावह बीमारी से बच पाना मुश्किल है।