पहल गुप्ता, नई दिल्ली: Akshay Tritiya 2022: अक्षय तृतीया को हिंदू धर्म के अंतर्गत बहुत महत्त्व दिया जाता है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन हम किसी भी शुभ काम को प्रारंभ कर सकते हैं। ये विशेष पर्व ज्यादातर बैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की तीसरी दिन मनाया जाता है। भारत के कई राज्यों में इस त्योहार को हम आखा तीज (Aakha teej) के नाम से भी जाना जाता हैं। इस दिन धन की देवी माता महालक्ष्मी की पूजा की जाती है। ऐसा कहा जाता है की इस दिन सोने की कोई भी वस्तु खरीदना बहुत ही शुभ माना जाता है। इस साल अक्षय तृतीया का पावन पर्व 3 मई को मंगलवार के दिन पड़ रहा है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं इस त्योहार की कुछ खास बातें:

अक्षय तृतीया का शुभ मुहूर्त:

अक्षय तृतीया तिथि के शुभ मुहूर्त का प्रारंभ प्रथम दिन 3 मई की सुबह 5 बजकर 19 मिनट पर हो जाएगा। जिसके बाद अक्षय तृतीया का समापन ठीक उसके अगले दिन 4 मई की सुबह 7 बजकर 33 मिनट से लेकर 35 मिनट पर होगी। वही अगर बात हम रोहिणी नक्षत्र की करें तो उसका प्रारंभ भी 3 मई की दोपहर को 12 बजकर 34 मिनट से प्रारंभ होने वाला है और इसका भी समापन इसके ठीक अगले दिन 4 मई की भोर 3 बजकर 18 मिनट पर होगा।

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अक्षय तृतीया के दिन करें शुभ काम:

हिंदू पंचांग यानी हिंदी कैलेंडर के अनुसार अक्षय तृतीया का धार्मिक दिन एक बहुत ही मांगलिक दिन माना जाता है। आपकों बता दें की यदि इस दिन हम किसी शुभ काम का प्रारंभ करते हैं तो हमे सफलता जरूर मिलती है। इस दिन अबूझ मुहूर्त (Abujh Muhurat) भी होता है। ये भी एक पावन मुहूर्त माना जाता है। इस दिन हम शादी – विवाह करना, नए कपड़े खरीदना ,सोने-चांदी के नए आभूषण खरीदना, नए बर्तन खरीदना, साथ ही साथ घर के लिए वाहन या प्रॉपर्टी खरीदने जैसा कामों के कर सकते हैं। अक्षय तृतीया की पावन तिथि को दान पुण्य करना, किसी जरूरतमंद की मदद करना बहुत ही अच्छा माना जाता है। ऐसे करने से घर में धनधान्य की बढ़ोतरी होती है।

अक्षय तृतीया से जुड़ी कहानियां:

आपको बता दें की वैसे तो अक्षय तृतीया के जुड़ी हुई बहुत सारी पौराणिक कहानियां प्रचलित हैं। लेकिन इसमें सबसे महत्वपूर्ण कहानी ये है की इस दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान भगवान परशुराम जी (Parshuram ji) का जन्म हुआ था। इसलिए इस दिन हम अक्षय तृतीया के साथ- साथ परशुराम जंयती भी मानते हैं। इसके अलावा ऐसा भी माना जाता है कि अक्षय तृतीया के दिन नर-नारायण ने धरती पर अवतरित होकर एक नए प्रारब्ध का प्रारंभ किया था। आपकों बता दें की अक्षय तृतीया के ही पावन दिन माता अन्नपूर्णा (Maa Annapurna) का भी जन्म हुआ था। इस वजह से इस दिन रसोई की पूजा की जाती है।

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