खबरें पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें


वैसे तो आज कल लड़का और लड़की की परवरिश समान रूप से ही की जाने लगी है, फिर भी एक माता-पिता के नाते अपनी बेटी को कुछ ऐसी बातें सिखानी चाहिए जिसकी मदद से वो मानसिक रूप से मज़बूत हो सके।

खबरें पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें


अगर परवरिश ठीक ढंग से की जाए तो लड़कियां सही गलत के बीच फरक करती हैं। कुछ गलत लगने पर अपने लिए खड़ी होती हैं।

खबरें पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें


हम सभी जानते हैं कि लड़कियों से आज भी सबकी देखभाल करने कि उम्मीद रखी जाती है और लड़कियां ‘emotionally driven’ होने के कारन सबका ख्याल रखना पसंद भी करती हैं।

खबरें पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें


ऐसे में हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि अपनी बच्चियों को खुद का ख्याल रखना भी सिखाया जाए। तो चलिए जानते हैं वो 3 अहम बातें जो बेटियों की परवरिश के समय उनको ज़रूर सिखानी चाहिए…

खबरें पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें


गलत चीज़ों और हालातों से लड़ने के लिए बेटियों को कम उम्र से ही तैयार करना चाहिए। उनके साथ होने वाला दुरव्यव्हार या होने वाले भेदभाव के खिलाफ सजक करें। बेटियों को गुड टच (good touch) और बैड टच (bad touch) की जानकारी शुरू से दें।

खबरें पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें


यह भी ज़रूरी है की बेटियां इस बात से डरके अकेला न जूझें बल्कि परिवार वालों से बातें खुल के करें। कुछ भी गलत लगने पर या अनुभव करने पर, बच्चियों को उसके खिलाफ बोलने और उसके खिलाफ खड़े होना भी सीखा दें।

खबरें पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें


शादी से पहले पिता और फिर पती पर निर्भर होना कई मायनो में सही नहीं होता। बेटियों को दी जाने वाली शिक्षा का अहम हिस्सा है उनको इस लायक बना देना, की वे आर्थिक रूप से किसी के आगे हाथ न फैलाएं।

खबरें पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें


हाथ फैलाने से स्वाभिमान को ठेस पहुंचकर निम्न द्रिष्टि से देखें जाने में खुद को भी बहुत ठेस पहुँचती है। इससे बेहतर यह रहेगा कि बेटियां आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर (financially independent) बन जाएँ।

खबरें पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें


आज़ादी का सही मतलब बताएं। बेटियों को बताएं की आज़ादी से कैसे जिया जाता है। बेटियों को ये भी बताना ज़रूरी होगा कि आज़ादी का मतलब ऐब में पड़ना और ज़िम्मेदारियों से भागना नहीं है।

खबरें पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें


आज़ादी का मतलब है अपने कर्तव्यों को निभाते हुए खुद को सर्वश्रेष्ठ रखना। किसी के दबाव में आकर गलत फैसलों से दूर रहना ही आज़ादी है।